महाश्वेता देवी की कहानी पर बनी थी संघर्ष

बांगला लेखिका महाश्वेता देवी का आज ९० साल की आयु में निधन हो गया। महाश्वेता देवी की रचनाओं पर कुछ यादगार और बहुप्रशंसित फिल्मों का निर्माण हुआ है। हिंदी दर्शकों को, पहली बार महाश्वेता देवी की कलम से बजरिया रुपहला पर्दा रुबरु होने का मौका मिला हरमन सिंह रवैल की फिल्म संघर्ष से। २७ जुलाई १९६८ को रिलीज़ यह फिल्म महाश्वेता देवी की लघु कथा लाय्ली आसमानेर अयना पर आधारित थी। यह फिल्म वाराणसी की मशहूर ठगी और ठगों के दो गुटों के बीच संघर्ष पर थी। इस फिल्म में दिलीप कुमार, वैजयंतीमाला, जयंत, बलराज साहनी, संजीव कुमार, उल्हास और इफ़्तेख़ार जैसे सशक्त अभिनेताओं ने दमदार अभिनय किया था। लेकिन, यह फिल्म फ्लॉप हुई थी। निर्देशक कल्पना लाजमी ने महाश्वेता देवी की एक अन्य लघु कथा पर फिल्म रुदाली का निर्माण किया। डिंपल कपाडिया, राज बब्बर, राखी और अमजद खान की मुख्य भूमिका वाली यह फिल्म ऑस्कर की विदेशी फिल्मों की श्रेणी के लिए भेजी गई। महाश्वेता देवी के १९७५ में प्रकाशित पुस्तक मदर ऑफ़ १०८४ पर गोविन्द निहलानी ने हजार चौरासी की माँ का निर्माण किया था। यह फिल्म एक ऐसी माँ की कहानी थी, जिसका पुत्र नक्सल आन्दोलन में अपनी जान गंवा देता है। इस फिल्म में जया बच्चन ने माँ की भूमिका की थी। इस फिल्म ने १९९८ में बेस्ट फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता। उनकी एक दूसरी लघु कथा चोली के पीछे पर एक इतालवी फिल्म डायरेक्टर इटालोस्पिनेली ने फिल्म गंगोर का निर्माण किया। इस फिल्म को बंगाली, संथाली और इंग्लिश में बनाया गया। यह फिल्म इतालवी भाषा में डब कर इटली के फिल्म फेस्टिवल में दिखाई गई। मशहूर फिल्म अभिनेता अमोल पालेकर की पत्नी चित्रा पालेकर ने महाश्वेता देवी की कहानी बायेन पर मराठी फिल्म माती माय का निर्माण किया था। महाश्वेता देवी की रचनाओं पर बनी यह सभी फ़िल्में सशक्त चरित्रों और समाज को निशाना बनाते कथानकों के कारण चर्चा में रहीं। उन्हें श्रद्धांजलि। 

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