होली में बड़ो से आशीर्वाद और छोटो को गले लगाने की परंपरा निभाता हूँ--कैलाश खेर

फागुन मास में आता है, होली का रंग बिरंगा त्यौहार. सारे भारत में इसे धूम-धामसे मनाते हैं, ­एक दूसरे के चेहरे पर अबीर-गुलाल लगाते हैं, गले मिलते हैं और मिठाई खाते हैं. रंग-बिरंगा त्यौहार हो और नाच गाना मस्ती हो यह तो ही नही सकता. आम लोग तो अपने इस त्यौहार को इस तरह ही मनाते हैं, गायक कैलाश खेर इसे कैसे मनाते हैं इस रंग बिरंगे त्यौहार को पूछने वो बताते हैं?
जहाँ तक मेरी कोशिश रहती है इस त्यौहार को मैं अपने परिवार के साथ मनाता हूँ, कोशिश करता हूँ की जैसे हमने पारंपरिक तरीके से मनाया है बचपन से लेकर बड़े होने तक, उस तरीके से ही मनाऊं क्योंकि मेरा बेटा कबीर भी बड़ा हो रहा है और मैं चाहता हूँ कि वो हर पूजा पर त्यौहार के बारे में बारीकी से जाने और समझे हमारी सभ्यता और संस्कृति को. जिससे बड़े होने पर उसे गूगल में सर्च नही करना पड़े की किसी के भी बारे में जानने की. होलिका दहन होता है और उसके अगले दिन होली खेली जाती है वो मैं सब करता हूँ इसके साथ ही नाच गाना तो होता ही है.
दोस्तों परिवार के साथ होली खेलता हूँ बड़ो से आशीर्वाद और छोटो को गले लगाने की परंपरा भी निभाता हूँ.

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